अथ श्री बेलन तान दे कथा

अथ श्री बेलन तान दे कथा


बहुत समय पहले की बात है, एक नगर में बेलन तान दे नामक स्त्री रहती थी। नगरवासियों के मध्य इसी नाम से प्रसिद्ध थी। असली नाम से कोई परिचित नही था। उसकी ख्याति देवलोक तक पंहुची, तो नारद मुुनि उसकी परीक्षा लेने के लिए मृत्यु लोक आये। नारद जी बोले - हे स्त्री, तुम्हारा यह नाम किस कारण वश पड़ा। स्त्री बोली- हे नारद जी, मैं पूर्व जन्म में एक गरीब, चंचल एवं अपने मन की करने वाली स्त्री मैनावती थी। किसी बड़े का कहना नही मानती थी। पर पुरुषों को अपनी बातों में फंसाकर लूटना मेरा कार्य था।
बेलन तान दे कथा का पहला अध्याय समाप्त।

नारद जी बोले- हे स्त्री, इसके आगे की कथा कहो।
स्त्री बोली- हे मुनि, धीरे धीरे मैं समृद्ध होने लगी। नगरवासी मेरे मोहपाश में फंसने लगे। इससे उनकी स्त्रियां अन्यन्त दुखी हो गईं। उन सभी ने मिलकर मेरा वध करने का निश्चय किया। हे मुनि, जब परिवार पर संकट आता है तो घर की स्त्रियां काली रूप भी धर लेती है। कुछ इसी प्रकार का कार्य उन स्त्रियों द्वारा किया गया। एक सुबह की बात है, मैं एक आवश्यक कार्यवश पास के एक नगर जा रही थी, बीच मे एक भयावह वन पड़ा।
बेलन तान दे कथा का दूसरा अध्याय समाप्त।

नारद मुनि बोले- हे स्त्री , आगे की कथा कहो।
मैनावती बोली- हे मुनिवर वन प्रदेश में स्वयं को अकेला पाकर भययुक्त हो रही थी, इतने में सभी स्त्रियां , जो मुुझसे
आक्रांत थीं, वे बाहर निकल आईं और मुझ पर आक्रमण कर दिया। उन्होंने मुझे लज्जाहीन, कुलटा आदि आदि अनेकों शब्द बाण छोड़े। और कहा क्यों स्वयं को समृद्ध करने हेतु दूसरों के घरों को बर्बाद करती हो। क्या एक स्त्री के लिए यह उचित है।
बेलन तान दे कथा तीसरा अध्याय समाप्त।
 नारद जी बोले- हे स्त्री , आगे की कथा कहो।
मैनावती बोली कि सभी स्त्रियों के कहने पर मुझे अपनी त्रुटि का अनुभव हुआ। किन्तु समय अधिक हो गया   था। कुछ ही समय मे मेरी मृत्यु हो गयी।  वह 14 फरवरी का ही दिन था। 
इस जन्म में मैं पूर्व जन्म में किये पापों का प्रायश्चित कर रही हूं।
जब भी कोई स्त्री या पुरुष, इस आचरण का मिलता है, मैं उसे बेलन से मारती हूँ। इसी कारण नगर वासी मुझे बेलन तान दे के नाम से जानते हैं।
नारद जी बोले - हे स्त्री, कलयुग में तुम्हारे इस कार्य को करने वाले अधिक लोग होते जाएंगे। जो इस कथा का पाठ करेगा, उसे बेलन खाने से मुक्ति मिलेेेगी।
बेलन तान दे कथा का अंतिम अध्याय समाप्त।
इति सम्पन्न।

            आरती श्री बेलन भैया

जय बेलन भैया, ॐ जय बेलन भैया,
जिसके सर पर पड़ता, हाय दैया कहता,
ॐ जय बेलन भैया ।1।।
रोटी, पूरी, कचौरी, तुझसे बेले जाते,
कुछ मजनू लंपट भी, तुझसे कूटे जाते,
ॐ जय बेलन भैया ।2।।
अस्त्र शस्त्र बनाकर, तेरा प्रयोग करता,
ढंग से वार जो होता, शत्रु इससे मरता,
ॐ जय बेलन भैया।3।।
कुछ पतले कुछ मोटे, बेलन पाये जाते,
कुछ भोजन बनाते, कुछ खाये जाते,
ॐ जय बेलन भैया।4।।
बेलन भैया की आरती, जो सुधिजन गावें,
स्वामी प्रेम सहित गावें,
मिले अक्षय प्रसाद, सुखी जीवन पावे।
ॐ जय बेलन भैया।5।।

Yaduvesh Chaturvedi