स्वर्णिम नगरी श्रीलंका 

स्वर्णिम नगरी श्रीलंका 

कुबेर द्वारा निर्मित अभूतपूर्व, अनुपम विहंगम स्वर्ण नगरी श्रीलंका सहज ही एक कौतूहल पैदा करती है। श्रीलंका एक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सुदृढ़ सामाजिक जड़ों वाला देश है। काफी समय से मन में श्रीलंका देखने की महती इच्छा थी, अचानक अपने पुराने मित्रों के साथ तुरत फुरत में एक बेहतरीन कार्यक्रम श्रीलंका यात्रा का तय हो गया। नए देश को लेकर कुछ पूर्वाग्रह,  कुछ उत्कंठाएं और ढेर सारी उत्सुकता थी। हमारा प्रवास क्योंकि मुंबई में बच्चों के पास था उनकी सलाह और सहायता से तैयारी शुरू कर दी गई, नए देश की करेंसी, खान-पान, मौसम और परिधान विषयक तैयारी कर ली गई। 

 टूर से संबंधित संपूर्ण तैयारी एयरपोर्ट से लेकर 8 दिन और 7 रात्रि के  भ्रमण और ठहरने आदि की व्यवस्था टूर ऑपरेटर के माध्यम से निर्धारित की गई। 
27 फरवरी से 6 मार्च 2025 तक की यात्रा काल का पहला दिवस आ गया।. 
सभी मित्रगण अपने शहर से मुख्य गंतव्य मुंबई पहुंच गए। दोपहर 12:10 की फ्लाइट से कोलंबो के लिए हवाई यात्रा शुरू हुई। मीलों फैला खूबसूरत, उछलता, लहराता समुद्र,  घने हरे भरे जंगलों ने मन मोहना शुरू कर दिया था। ढाई घंटे की यात्रा मानो चुटकियों में पूरी हो गई। पूर्व निर्धारित टूर ऑपरेटर मिस्टर इशारा ने फूल मालाओं से हम सबका स्वागत एयरपोर्ट पर किया, साथ ही टोयोटा हाइस 10 सीटर लेकर हमारे गाइड कम ड्राइवर दुशानत हम सब  का इंतजार करते मिले। रास्ते में एक रेस्टोरेंट में स्वल्पाहार के साथ ही भंडारनायके (Bandaranaike) एयरपोर्ट से कोलंबो शहर की यात्रा आरंभ हुई। शाम ढलने लगी थी, लगभग डेढ़ घंटे की सड़क यात्रा के बाद हम कोलंबो शहर पहुंच गए। रोशनी में नहाई हाईराइज़ इमारतें, बिना स्पीड ब्रेकर के निर्धारित गतिसीमा में अनुशासित वाहन, ब्रिटिश कालीन आर्किटेक्ट के दर्शन कराती पीएम हाउस, पुराना संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, एंम्बेसी बिल्डिंग, लोटस शेप होटल, बीएमआईसीएच आदि कई दर्शनीय स्थलों की सैर हमने गाड़ी से ही की। रात्रि 8:30 बजे के आसपास हम होटल ओसियन एज सूट्स (Ocean edge suites) पहुंच गए।  समुद्र किनारे बना यह भव्य विश्राम स्थल बेहद सुंदर और सुकून देने वाला था। चार सितारा होटल की तमाम सुख सुविधाओं से लैस इस जगह पर हमने रात्रि कालीन भोजन किया। थकान भरे दिन का समापन होटल के आरामप्रद बिस्तर पर हुआ। 

28 फरवरी 2025 की सुहानी भोर में ब्रेकफास्ट के बाद, श्रीलंका के दूसरे आकर्षण मिरीसा (Mirissa) के लिए रवानगी थी। रास्ते भर समुद्र हमारा साथी बना रहा, गहरा नीला, चमकीला, कभी-कभी हरा, मीलो तक अठखेलियाँ करता रहा। समुद्र किनारे बनी ट्रेन पटरिया से गुजरती कोई ट्रेन उसे छेड़ जाती। मिरिसा  से पहले हमने स्पीड बोट के माध्यम से करीब 1 घंटे बोटिंग का आनंद उठाया, ठंडी हवाएं, तेज गति बोट और अपने पुराने दोस्तों के साथ ने पलों को बहुत यादगार बना दिया। कैमरों और यादों के झरोखों में इन दृश्यों को कैद कर आगे बढ़े। राह में टर्टल म्यूजियम देखना एक अलग अनुभव था, लुप्तप्राय  प्रजातियों के कछुए जीवन के प्रारंभ अंडों से लेकर 100-150 साल की यात्रा कैसे तय करते हैं इस की  बानगी वहां देखने को मिली। इसके बाद मून स्टोन माइन देखने का अवसर मिला। पुरातन तरीके से कूआ खोद कर उसमें से स्टोन निकालना और गहनों तक का निर्माण देखना अद्भुत था। इसके अलावा दालचीनी निर्माण प्रक्रिया भी अनूठी थी। 
गाले डचफोर्ट (Galle Dutch fort) जोकि यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट भी है।  उसके आसपास का क्षेत्र हमारा अगला गंतव्य था। डच कालीन यह फोर्ट 1938 में संभवतः  लाइट हाउस के साथ जगमगाया। इसके बाद हम सभी मिरीसा में अपने गंतव्य क्लब पैराडाइज बीच होटल(Club Paradise Beach Hotel) पहुंच गए, बेहद शानदार होटल कमरे के सामने स्विमिंग पूल और कुछ दूरी पर अट्टाहास करता समुद्र, सपनों को मानो पंख लग गए हो, प्रकृति का इतना उल्लास मय उत्सव कभी-कभी देखने में आता है। सफेद चमकीली बालू पर कदम कालीन सा अनुभव कर रहे थे। 
1 मार्च अगली यात्रा हमें मिरीसा से याला(Yala) की तय करनी थी, यहां हमने  याला नेशनल पार्क की सफारी जीप द्वारा की। राह में हाथियों से मुलाकात हुई, तेज बारिश और गाड़ी का जंगल में फॅसना, तुरंत सहायता मिलना आदि यात्रा के रोचक प्रसंग थे। हां किसी भी लेपर्ड के यहाँ दर्शन बिल्कुल भी ना हो सके। लौट कर कटारा गामा(Kataragama) के एक बेहद लाजवाब होटल मंडारा रोशन होटल (Mandara Roshen Hotel) आ पहुंचे। झरोखों का बेहद बारीक और मोहक लकड़ी का काम यहां देखने को मिला। बतखों के पौंड़ ने भी मन मोह लिया। 
2 मार्च यात्रा का अगला पड़ाव  याला (Yala) से  एला (Ella) और फिर नूवारा एलिया (Nuweraeliya) था। ब्रेकफास्ट के बाद हम चल पड़े और रास्ते में रावण फौल देखा, पहाड़ों की ऊंचाई से सफेद कल कल करता झरना तेज आवाज के साथ धरा पर बह रहा था। कुछ मोहक नजा़रे हम लोगों ने कैमरे में कैद कर लिए, उसके बाद हमने सीता माता का अग्नि परीक्षा स्थल देखा, मंदिर के आगे के हिस्से में बहुत खूबसूरत बौद्ध मंदिर था। दीवारों पर मोहक भित्ति चित्र थे। मंदिर के पुजारी ने हमें बहुत रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी दी, बेहद रोचक बिंदु यह था कि वह पुजारी बौद्ध धर्म को मानने वाले थे। बावजूद इसके उन्होंने अग्नि परीक्षा स्थल सीता माता मंदिर की बेहद रोचक जानकारी दी, क्योंकि सीता माता का यह मंदिर अकेला ऐसा स्थल है। पुजारी ने महिलाओं को भरपूर सम्मान देते हुए महिलाओं से मंदिर का ताला खुलवाया। श्रद्धापूर्वक  पूजन करवाया और सिंदूर का प्रसाद दिया। वहां वेल का एक ऐसा वृक्ष भी देखा जिसमें बेल, संतरा और आम तीनों की खुशबू थी। एक अन्य मजेदार जानकारी थी कि जहां अग्नि परीक्षा स्थल है, उसके नीचे ढेर सारा स्वर्ण है जिसकी रक्षा सात नाग करते हैं। मंदिर के पीछे की घाटियों में राम और रावण के युद्ध स्थल के दर्शन कराए गए, बाहर एक हनुमान जी की आकर्षण मूर्ति भी थी। 
3 मार्च 2025 पूर्व रात्रि में हम होटल हैवन सैवन (Hotel Heavan Seven) पहुंच गए थे। सुबह तैयार होकर सीता अमन कोविल के लिए निकल पड़े प्रकृति की अनुपम गोद में बसा मंदिर बेहद आकर्षक था। श्री राम, लक्ष्मण और सीता माता की काले पत्थर की भव्य मूर्तियां मानो प्राण मय हों। अशोक वाटिका क्षेत्र के नाम से मशहूर मंदिर के पिछले हिस्से में किलोलें मारता झरना, अशोक वाटिका का दृश्य जहां माता सीता की और हनुमान जी की प्रतिमा थी, साथ ही हनुमान जी के विशालकाय पैरों के निशान भी दृश्य थे। उसके बाद गायत्री मंदिर के दर्शन किए और साथ ही इंद्रजीत मंदिर भी देखा। पास ही एक हिंदी भाषी श्रीलंका के व्यक्ति के स्टॉल पर ज़ायकेदार चाय पी। दोपहर के भोजन के उपरांत वहां सिटी टूर के दौरान डच आर्किटेक्ट में बना पोस्ट ऑफिस देखा, वोटिंग की, खूबसूरत इमारतें देखी रात्रि में होटल में विश्राम किया। 
4 मार्च ब्रेकफास्ट के तुरंत बाद हम शीघ्र ही नानबॉया (Nanuoya) ट्रेन स्टेशन के लिए निकल पड़े,यहां से कैंडी नामक स्टेशन पहुंचने के लिए 3 घंटे की यात्रा की जानी थी। प्रातः 9:00 बजे हमने ट्रेन पकड़ी थी। घने जंगलों के बीच का यह ट्रेन सफर बेहद रोमांचक था। घुमावदार मोड़, दोनों तरफ चाय के बागान, छोटे-छोटे स्टेशन, फोटो खींचने की होड, ऊंचे ऊंचे दरख्त सभी के बीच हमारी ट्रेन यात्रा पूरी हुई। कैंडी (Kandy) आ चुका था। शाम को हमने जैम (Gem) एंपोरियम देखा, साथ ही प्रारंभिक पत्थर से लेकर हमारी अंगूठी आदि तक पहुंचाने का प्रोसेस जाना और समझा। डायमंड या किसी भी कीमती स्टोन की कीमत 4C कलर, कटिंग, क्लेरिटी और केरट से निर्धारित होती है ऐसी हमें जानकारी प्राप्त हुई। कैंडी मध्य प्रांत की राजधानी होने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और धार्मिक शहर भी है। कैंडी में श्री दलदा मालीगांव या पवित्र दांत अवशेष का मंदिर भी स्थित है। जिसे बौद्ध धर्मावलंबी बौद्ध धर्म के कुछ सबसे पवित्र पूजा स्थलों में से एक मानते हैं। 1988 में इस मंदिर को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। मंदिरों की इस विहंगम श्रृंखला को देखकर मन और आत्मा दोनों तृप्त हो गए। 
अब हम अपने अगले होटल रॉयल कंदन(Royal Kandyan Hotel) आ पहुंचे। भव्य शोरूम और रिसेप्शन की शानदार लॉबी देखते हुए, हमने चैक इन किया। होटल के ऑडिटोरियम में श्रीलंका की संस्कृति पर आधारित एक नृत्य श्रृंखला देखी और उनके साथ डांस भी किया। अब विश्राम का समय था, साथ ही वापसी भी नजदीक आ रही थी। 
5 मार्च 2025 नुवारा एलिया (Nuweraeliya) से पुनः कैंडी जाना था। सबसे पहले हमने  वुड हैंडीक्राफ्ट का विशाल शोरूम देखा, जहां तरह-तरह के छोटे-बड़े फर्नीचर, मुखौटे, मूर्तियां और न जाने कितनी अचंभित करने वाली कलाकृतियां थी। साथ ही विभिन्न लकड़ियों से कैसे इस यात्रा तक पहुंच जाता है इस का संक्षिप्त विवरण दिया गया , एक विशेष लकड़ी से अलग-अलग प्राकृतिक रंग  बनाने की  क्रिया भी बड़ी ही चमत्कारी थी।
     इसके बाद अगला पडाव चाय पत्ती बनाने की प्रक्रिया कैसी होती है, मशीनों के द्वारा दिखाते हुए दी गई। कुछ पैकेट चाय पत्ती के हमने खरीदे और एक कप श्रीलंका की लजीज चाय का स्वाद भी लिया।.        

दोपहर होते-होते हम एक नए अनुभव के लिए तैयार थे। पिन्नावाला(Pinnawala) एलीफेंट औरफनएज़ जहां बीमार और ग्रुप से अलग बिछड़े जंगली हाथियों की शरण स्थली है जाने का अवसर मिला । हमारा सौभाग्य था की इन हाथियों के झुंड को नदी में एक साथ नहाते और अठखेलियाँ  करते देखा और कुछ फोटो भी खिंचवाऐ, कुछ खरीद दारी की और पुनः कोलंबो के लिए चल पड़े। शाम तक हम यहां पहुंच गए थे, देर शाम हम लोग कोलंबो के सबसे प्रसिद्ध गंगा रामाया मंदिर(Ganga Ramaya Temple) नियर बेरा लेक(Beira lake) देखने गए, जो की मॉडर्न आर्किटेक्ट और सांस्कृतिक खुशबू का अनोखा संगम था। 
6 मार्च 2025 पुनः देश आने का दिन आ गया। फ्लाइट शाम 4:00 बजे की थी। अतः दिन के कुछ हिस्से का प्रयोग हमने कोलंबो की कुछ और यादें ले जाने के लिए रखा। प्रसिद्ध आंजनेय मंदिर जो की हनुमान जी का एक बहुत सुंदर मंदिर है, और माता काली मंदिर के दर्शन किए। एक प्रसिद्ध जापानी स्टोर में कुछ क्रोकरी देखी। साथ ही चायना बाजार का नजारा भी किया। अंततः एयरपोर्ट का रुख किया, ढेर सारी सुहानी यादगार स्मृतियों के साथ हम पुनः मुंबई के लिए रवाना हो गए। यात्रा की सुखद और मीठी  स्मृतियों को संजोये और याद करते हुए मन और आत्मा अभी भी आह्लादित  है ।

 

Dr Renu Chaturvedi